काशी सत्संग : मौत का भय

दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे थे। एक ने अपने मुंह में सांप को दबोच रखा था और दूसरे उल्लू ने मुंह में एक चूहा दबा रखा था। दोनों वृक्ष पर पास—पास बैठे थे। सांप ने चूहे को देखा, तो वह यह भूल ही गया कि वह उल्लू के मुंह में है और […]

काशी सत्संग : परमात्मा से बीमा

दो मित्र थे, बड़े परिश्रमी और मेहनती। अपने परिश्रम से दोनों एक दिन बड़े सेठ बन गए। दोनों ने बड़ा व्यवसाय खड़ा कर लिया। पहले सेठ ने अपनी सारी संपत्ति का बीमा करवा लिया। उसने अपने मित्र को बार-बार यही परामर्श दिया, परंतु दूसरे मित्र ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। दुर्भाग्य से एक […]

काशी सत्संग : परमात्मा का द्वार

एक बार एक पुत्र अपने पिता से रूठ कर घर छोड़ के दूर चला गया और फिर इधर-उधर यू ही भटकता रहा। दिन बीते, महीने बीते और साल बीत गए!एक दिन वह बीमार पड़ गया। अपनी झोपड़ी में अकेले पड़े हुए उसे अपने पिता के प्रेम की याद आई, कि कैसे उसके पिता उसके बीमार […]

काशी सत्संग : ध्यान का पंख

बहुत समय पहले की बात है, एक राजा को किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किए। राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे, तो उन्होंने बाजों की देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।कुछ समय पश्चात जब दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे, तो एक दिन […]

काशी सत्संग : नौकर को कोड़े!

पुराने समय की बात है। एक राजा के महल में उसके शयन कक्ष की सफाई करने वाला नौकर एक दिन राजा का बिस्तर ठीक कर रहा था। मुलायम बिस्तर को छूकर नौकर के मन में बिस्तर पर लेटकर देखने का लालच जागा। नौकर ने कक्ष के चारों और देख कर इत्मीनान कर लिया कि कोई […]

काशी सत्संग : स्वभाव पर वश

एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा, ‘मैं बहुत जल्दी क्रोधित हो जाता हूं। कृपया मुझे इससे छुटकारा दिलाएं।’गुरु ने कहा- ‘यह तो बहुत विचित्र बात है! मुझे क्रोधित होकर दिखाओ।’ शिष्य बोला, ‘अभी तो मैं यह नहीं कर सकता।’ ‘क्यों?’ गुरु बोले। शिष्य ने उत्तर दिया, ‘यह अचानक होता है।’गुरु ने कहा, ‘ऐसा है […]

काशी सत्संग : ईश्वर का पता

रात के एक बज रहे थे और सेठजी को नींद नहीं आ रही थी। वह घर में चक्कर लगाकर आखिर थक गए और कार में बैठकर शहर की सड़कों पर निकल पड़े। रास्ते में एक मंदिर दिखा, तो सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूं, प्रार्थना करता हूं, तो शायद […]

काशी सत्संग : विश्वास की शक्ति

एक आदमी शादी कर के अपनी पत्नी के साथ घर वापस लौट रहा था। दोनों एक बड़ी झील को नाव से पार कर रहे थे, तभी अचानक एक भयंकर तूफान आ गया! वो आदमी वीर था, किंतु उसकी पत्नी हालात को देखते हुए काफी डरी हुई थी। नाव बहुत छोटी थी और तूफान इतना विकराल […]

काशी सत्संग : एक सच्चा योद्धा

यह घटना उस समय की है, जब कोलम्बस अपनी महान यात्रा पर निकलने वाला था। चारों तरफ नाविकों में हर्षोल्लास का वातावरण था, परंतु गांव का ही एक युवक फ्रोज बहुत ही डरा हुआ था और वह नहीं चाहता था कि कोलम्बस इस यात्रा पर जाए। वह नाविकों के मन में समुद्री यात्रा के प्रति […]

होरी खेलत हैं गिरधारी

होरी खेलत हैं गिरधारी।मुरली चंग बजत डफ न्यारो।संग जुबती ब्रजनारी।।चंदन केसर छिड़कत मोहनअपने हाथ बिहारी।भरि भरि मूठ गुलाल लाल संगस्यामा प्राण पियारी।गावत चार धमार राग तहंदै दै कल करतारी।।फाग जु खेलत रसिक सांवरोबाढ्यौ रस ब्रज भारी।मीरा कूं प्रभु गिरधर मिलियामोहनलाल बिहारी।। ● मीराबाई kashipatrikaNews and Views about Kashi… From Kashi, for the world, Journalism redefined