काशी सत्संग : परहित सरिस धर्म…

एक व्यक्ति किसी काम से दूसरे शहर गया। वह अपने मित्र के घर पर ठहरा था। उसके मित्र की डेयरी थी, जिस काम में उसकी पत्नी भी सहयोग करती थी। एक दिन दोस्त की पत्नी काफी उदास थी, तो व्यक्ति ने उससे पूछा,’भाभी! आज इतनी उदास क्यों हो?’ इस पर वह बोली,’आज तबेले से दूध […]

काशी सत्संग : बुद्ध और शिष्य

महात्मा बुद्ध एक दोपहर वन में एक वृक्ष तले विश्राम के लिए रुके। उन्हें प्यास लगी, तो उनका शिष्य पास के पहाड़ी झरने पर पानी लेने गया । झरने का पानी गंदा था। कीचड़ ही कीचड़ और सड़े पत्ते उसमें उभर कर आ गए थे। शिष्य पानी बिना लिए ही लौट आया। उसने बुद्ध से […]

काशी सत्संग : लालच बुरी बला

किसी शहर में चार ब्राह्मण मित्र रहते थे । वे बहुत गरीब थे। धनी बनने की चाहत में चारों अपने घर से निकलकर उज्जैन नगरी पहुंच गए। वहां पर उन्हें एक तपस्वी साधु मिले। साधु के चरणों में प्रणाम कर वे चारों बैठ गए ।साधु ने उनसे वहां आने का कारण पूछा, तो चारों ने […]

काशी सत्संग : विनम्रता भली या अकड़

नदी के किनारे एक विशाल शमी का वृक्ष था और बगल में एक बांस का पेड़ भी था। बांस हवा के बहाव की दिशा में झुक जाता, लेकिन शमी का वृक्ष दृढ़ता से खड़ा रहता। एक दिन नदी में भयंकर बाढ़ आयी। प्रवाह प्रचंड था। शमी कर विशाल वृक्ष की जड़ों के नीचे की मिट्टी […]

काशी सत्संग: विद्या श्रेष्ठ या बुद्धि!

किसी गांव में चार ब्राह्मण पुत्र रहते थे, जिनमें से तीन तो शास्त्रों के विद्वान थे, किंतु उनके पास बुद्धि नहीं थी। चौथा पुत्र शास्त्र विद्या में निपुण नही था, किंतु बुद्धिमान था। एक बार उन्होंने सोचा कि हम क्यों न राजा के पास चलकर धन कमाएं!यहीं सोच वे चारों घर से निकले। रास्ते में […]

काशी सत्संग : बिन मांगे मोती मिले!

एक बार एक देश का राजा अपनी प्रजा का हाल-चाल पूछने के लिए गांवों में घूम रहा था। घूमते-घूमते उसके कुर्ते का बटन टूट गया, उसने अपने मंत्री को कहा कि इस गांव में कौन सा दर्जी है, जो मेरे बटन को सिल सके।उस गांव में सिर्फ एक ही दर्जी था। उसको राजा के सामने […]

काशी सत्संग : कल्पना के लड्डू

किसी गांव में एक पंडित रहता था। उसने दान के आटे से धीरे-धीरे एक बड़ा मटका भरकर अपने पास रख लिया। प्रतिदिन सुबह उठकर पंडित मटके की ओर देखता और सोचता, यदि कभी अकाल पड़ जाए, तो इससे थोडा धन कमाया जा सकता है। इस आटे के पैसे से मैं दो बकरियां खरीदूंगा। जब बकरियों […]

काशी सत्संग : दान से समृद्धि

एक भिखारी प्रतिदिन की तरह एक सुबह भिक्षा मांगने निकला। वह राजपथ पर बढ़ा जा रहा था। एक घर से उसे कुछ अनाज मिला। वह आगे बढ़ा और मुख्य मार्ग पर आ गया। अचानक उसने देखा कि नगर का राजा रथ पर सवार होकर उस ओर आ रहा है। वह सवारी देखने के लिए खड़ा […]

काशी सत्संग : सत्य और लक्ष्मी

एक दिन राजा सत्यदेव अपने महल के दरवाजे पर बैठे थे, तभी एक स्त्री उनके सामने से गुजरी । राजा ने पूछा, “देवी!आप कौन है और इस समय कहां जा रही हैं?”स्त्री ने उत्तर दिया, “मैं लक्ष्मी हूं और यहां से जा रही हूं।” राजा ने कहा , “ठीक है, शौक से जाइए ।”कुछ देर […]

काशी सत्संग : सफलता का फॉर्मूला!

एक बार एक सिद्ध पुरुष एक छात्र के घर पहुंचे। परीक्षा का समय निकट था, पर उसने साल भर कुछ खास पढ़ाई नहीं की थी । गुरुजी को देखकर उसने सोचा कि ये सिद्ध पुरुष आवश्य कोई बता दें! वह समय निकालकर गुरुजी के पास आया और बोला – मुझे किसी काम में सफलता नहीं […]