बेबाक हस्तक्षेप

यूपी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव परिणाम आने के साथ ही आज एक और सियासी ड्रामें का अंत ही गया। देश के पीएम जीत का सेहरा सूबे के सीएम योगी और कार्यकर्ताओं के सिर पर बांधते हुए उन्हें ट्वीट के जरिए बधाई देते हैं, तो वहीं सीएम गदगद होकर पंचायत चुनाव नतीजों को प्रधानमंत्रीजी की लोक कल्याणकारी नीतियों का प्रतिफल बताते हैं। इन सबके बीच, लोकतंत्र एक बार फिर लज्जित हो किसी कोने में दुबका अपनी लाचारी पर आंसू बहा रहा है, जिसे हर चुनाव के बाद कोई न कोई कठघरे में खड़ा कर देता है! आज पक्ष रहा, जब कभी विपक्ष का ताज पहने था, तब उसे भी इन चुनावों के परिणामों पर आपत्ति हुआ करती थी और अब उसी पक्षधर को सेलेक्शन में खोट दिख रहा है। जी हां, बात जिला पंचायत अध्यक्ष पद निर्वाचन की ही कर रहे हैं, जिसमें अध्यक्ष का चुनाव करने वाले ज़िला पंचायत सदस्यों को एक-एक वोट के बदले लाखों रुपये दिए जाने से लेकर भाजपा द्वारा सपा उम्मीदवारों को नामांकन नहीं करने दिए जाने तक के आरोप लगे। सपा ही नहीं बसपा और कांग्रेस ने भी खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए, पर परिणाम 75 में से 67 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के पक्ष में रही। जिनमें 21 पर भाजपा ने निर्विरोध जीत का परचम लहराया।
हालांकि, इन सबके बीच कुछ सवाल स्वयं सवाल बनकर ही रह गए, जैसे भाजपा उम्मीदवार ऐसे कई जिलों में भी अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित कैसे हो गए हैं, जहां उनकी पार्टी के महज दो-चार जिला पंचायत सदस्य ही जीते थे! वैसे, विशेषज्ञों की मानें तो, परोक्ष निर्वाचन से चुने जाने वाले जिला पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन पहले भी विवादित रहा है और आमतौर पर यह कहा जाता है कि ‘अध्यक्ष पद पर अक़्सर उसी पार्टी के उम्मीदवार जीत जाते हैं, जिस पार्टी की राज्य में सरकार होती है।’ यहां तक कि सरकार बदलने के बाद ज़िलों के पंचायत अध्यक्ष भी कई बार बदल जाते हैं, यानी दोबारा जिस पार्टी की सरकार बनती है, उसी के समर्थक जिला पंचायत अध्यक्ष बन जाते हैं।
कुल मिलाकर, तर्क-वितर्क सब यहां व्यथ का सिर्फ कुतर्क बनकर रह जाता है, क्योंकि लोकतंत्र की यह अलोकतांत्रिक सी परम्परा पहली नहीं है शायद और आखिरी भी नहीं!! तो मैं भी भाजपा को इस जीत की बधाई देती हूं और अन्य राजनीतिक दलों को सत्ता में सबकुछ जायज होने की परंपरा पर याद दिलाते हुए, मुजफ्फर वारसी की इन पंक्तियों के साथ छोड़ती हूं,
औरों के ख़यालात की लेते हैं तलाशी
और अपने गरेबान में झाँका नहीं जाता।’

■ सोनी सिंह

Post Author: Soni

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